Wednesday, April 1, 2009

निवेश के लिए किन-किन घटनाक्रमों का रखें ख्याल

बीती कुछ तिमाहियों के दौरान बाजार पर मंदी की छाया पड़ने के बाद पिछले सप्ताह वैश्विक बाजारों में ठीक - ठाक रैली देखी गई। बीते 10 कारोबारी सत्रों में महत्वपूर्ण बाजार इंडेक्स करीब 15 फीसदी चढ़े। बाजार में लौटी यह तेजी व्यापक थी और मंदी में पिटने वाले बैंकिंग तथा रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों के शेयरों को वापसी करने का मौका मिला। लेकिन यह रैली इस सप्ताह बरकरार नहीं रही। सप्ताह के पहले दिन बाजार की गिरावट ने यह साबित कर दिया कि निवेशकों में उत्साह लौटने की जो बात कही जा रही है , उसमें कितना दम है और भविष्य अब भी कितना अनिश्चित बना हुआ है। हाल में देखी गई तेजी वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटने और वापसी के शुरुआती संकेतों पर आधारित थी। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक बाजारों या अर्थव्यवस्थाओं में संभावित निर्णायक वापसी पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने इस तेजी को मंदी के असर वाले बाजार की एक और रैली करार देना मुनासिब समझा। इसे राहत की रैली भी कहा जा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार आने पर भारत जैसे उभरते हुए बाजारों में ज्यादा तेज और बड़ी रैली देखने को मिलेगी। ऐसा मुख्य रूप से विकसित बाजारों की तुलना में उभरते हुए बाजारों में अधिक बीटा फैक्टर की वजह से है।
कुछ ऐसी चीजें जिन्हें निवेश करते वक्त दिमाग में रखना चाहिए :
संभावित मजबूती
बीते कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान एकाध गिरावट के बावजूद बाजारों में तेज रैली दर्ज की गई और बाजार से जुड़े आम चलन पर नजर डाली जाए तो आने वाले दिनों में कुछ और मजबूती आ सकती है। बाजारों में हाल में जो तेजी आई है , वह काफी तेज और अनुमान से अलग थी , इसलिए ज्यादा निवेशक इसका फायदा नहीं उठा सके। ऐसे निवेशक अब बाजार की मौजूदा तेजी से जुड़ा मौका खोने का दु : ख मना रहे होंगे। लेकिन शेयर की कीमतों का पीछा करने और जल्दबाजी में ऊंचे स्तरों पर निवेश करने के बजाय बाजार में मजबूती लौटने तक इंतजार करने की सलाह दी जाती है। लेकिन वैश्विक और घरेलू , दोनों शेयर बाजार आने वाले दिनों में कौन सी राह पकड़ेंगे , इसे लेकर बिल्कुल सटीक ढंग से कुछ नहीं कहा जा सकता। हालांकि बुरी खबरों की गैर - मौजूदगी और अमेरिकी सरकार की ओर से पेश राहत पैकेज वैश्विक बाजारों में कुछ जान फूंकने का वादा जरूर कर रहा है।
वैश्विक बाजार
वैश्विक बाजारों में हालात अभी निर्णायक रूप से नहीं सुधरे हैं। बाजार की वर्तमान तेजी मुख्य रूप से शुरुआती संकेतों और कुछ विश्लेषकों एवं कंपनियों की ओर से सकारात्मक टिप्पणी की वजह से आई है। निवेशकों को सतर्क रवैया दिखाना चाहिए और जोखिम के दायरे में आने वाली पूंजी का एक अंश ही इक्विटी में निवेश किया जाना चाहिए। जो लोग बाजार में पैसा लगाते हैं , उन्हें वैश्विक खबरों और घटनाक्रमों पर निगाह रखनी चाहिए। वैश्विक बाजारों के घटनाक्रम मध्यम से लंबी अवधि में घरेलू बाजारों की चाल तय करने वाले अहम आधार होते हैं। अमेरिका और यूरोपीय बाजारों के अलावा एशिया की दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के घटनाक्रम भी घरेलू बाजारों की चाल पर असर डालते हैं।
सालाना रिटर्न
इस महीने सालाना नतीजों का मौसम शुरू होने वाला है। बाजारों के विशेषज्ञ सालाना नतीजों पर करीबी निगाह रखेंगे क्योंकि बीता कारोबारी साल काफी अलग और कंपनियों के लिए मुसीबतों से भरा था। विश्लेषक नए कारोबारी साल के लिए प्रबंधन के अनुमानों पर भी नजर रखेंगे। सालाना नतीजों का सीजन शुरू होने तक लंबी अवधि के लिए पैसा लगाने वाले निवेशकों को बाजार में नए निवेश को बरकरार रखना चाहिए। कंपनियों के सालाना नतीजे जल्द हमारे सामने होंगे। इनके आधार पर आप निवेश को लेकर आगे की राह तैयार कर सकते हैं। वित्तीय नतीजे आपको कंपनियों के बीच तुलना करने और भविष्य में उनकी संभावित स्थिति का अंदाजा लगाने का मौका देंगे।
राजनीतिक घटनाक्रम
आम चुनाव कुछ ही दिन दूर रह गए हैं। केंद्र में स्थिर सरकार होने पर बाजार सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के दौरान बाजारों में कुछ उठापटक हो सकती है और निर्णायक कदम केंद्र में नई सरकार उभरने के बाद उठ सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों को इन घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखनी चाहिए। जानकारों का कहना है कि केंद्र में अगर कांग्रेस या भाजपा की सरकार आती है तो बाजारों को इससे ज्यादा तकलीफ नहीं होगी लेकिन केंद्र में वामपंथी दलों और मायावती का प्रभुत्व बढ़ता है तो बाजार में उठापटक आने की आशंका कहीं ज्यादा है।
शोध जरूरी
निवेशकों के लिए बाजारों और शेयरों पर अलग - अलग स्त्रोतों से मत और निवेश के टिप्स पर कदम बढ़ाने के अलावा अपने स्तर पर किया जाने वाला विश्लेषण भी काफी अहमियत रखता है। निवेशकों को टिप्स जरूर लेनी चाहिए लेकिन फैसला अपना होना चाहिए। आम तौर पर बाजार में उपलब्ध विभिन्न आंकड़ों और जानकारी को समझना तथा उसका विश्लेषण करना आसान नहीं होता। इसके बावजूद निवेशकों को उन्हें समझने की कोशिश करनी चाहिए ताकि मेहनत की कमाई का निवेश करते वक्त उनका फैसला तार्किक और संतुलित हो। बाजार से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए आपके पास कई स्त्रोत उपलब्ध हैं लेकिन आपको किस स्त्रोत पर विश्वास करना है , इसका फैसला सबसे पहले कीजिए। गैर - विश्वसनीय स्त्रोतों से छनकर आने वाली खबरों पर भरोसा कर निवेश से जुड़े निर्णय जल्दबाजी में लेना , बेवकूफी के सिवा कुछ और नहीं।
निकलने का सही वक्त
बीते कुछ सप्ताह के दौरान बाजारों में कुछ बढ़ोतरी हुई है , ऐसे में यह उन निवेशकों के लिए माकूल वक्त है जो शेयर बेचकर निवेश से बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं। छोटी मियाद के लिए पैसा लगाने वाले लोगों को मौजूदा स्तरों पर मुनाफा वसूली करने के मौके तलाशने चाहिए और पहला मौका मिलते ही फायदा बटोरना चाहिए। जो निवेशक बाजार पर निगाह रखते हैं , उन्हें निवेश बरकरार रखना चाहिए लेकिन निवेश पर स्टॉप लॉस के साथ। आम तौर पर निवेशक मुनाफा वसूली न कर नुकसान के जाल में फंस जाते हैं।
-विकास अग्रवाल