Monday, May 4, 2009

क्या है कारपोरेट गवर्नेंस?

कारपोरेट गवर्नेंस क्या है?

किसी भी कंपनी को चलाने की प्रणालियों, सिद्धांतों और प्रक्रियाओं के मिले-जुले रूप को कॉरपोरेट गवर्नेंस कहते हैं। इनसे दिशानिर्देश मिलता है कि कंपनी का संचालन और उस पर नियंत्रण किस तरह किया जाए कि इससे कंपनी की गुणवत्ता बढ़े और इससे संबंधित लोगों को दीर्घकालिक तौर पर लाभ हो। यहां संबंधित लोगों के दायरे में कंपनी का निदेशक मंडल, कर्मचारी, ग्राहक और पूरा समाज शामिल है। इस तरह से कंपनी का प्रबंधन अन्य सभी लोगों के लिए ट्रस्टी की भूमिका में आ जाता है।



कॉरपोरेट गवर्नेंस के सिद्धांत क्या हैं?

पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कंपनी के कारोबार को चलाना कॉरपोरेट गवर्नेंस का मूल सिद्धांत है। इसमें लेनदेन की गतिविधियों में ईमानदारी बरतना, कंपनी के परिणामों और फैसलों को सार्वजनिक करना, देश के कायदे-कानून का पालन करना और लोगों के भरोसे को बनाए रखना शामिल है। कॉरपोरेट गवर्नेंस पर बाजार नियामक संस्था सेबी ने खास तौर पर कहा है कि कंपनी का प्रबंधन करते हुए यह साफ किया जाना चाहिए कि व्यक्तिगत संपत्ति के दायरे में क्या है और कंपनी की संपत्ति के दायरे में क्या है।

कॉरपोरेट गवर्नेंस क्यों महत्वपूर्ण है?

जिन कंपनियों का कॉरपोरेट गवर्नेंस अच्छा होता है, उन पर लोगों का भरोसा कायम रहता है। किसी कंपनी में स्वतंत्र निदेशकों की उपस्थिति और उनकी सक्रियता से बाजार में उसकी स्थिति अच्छी होती है। आम तौर पर देखा जाता है कि विदेशी संस्थागत निवेशक जब किसी कंपनी में अपना निवेश करना चाहते हैं तो वे कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर खासा ध्यान रखते हैं।

साथ ही कॉरपोरेट गवर्नेंस उस कंपनी के शेयरों की कीमत पर भी असर डालता है। यदि किसी कंपनी का कॉरपोरेट गवर्नेंस बेहतर होता है तो बाजार से उसे रकम जुटाने में भी आसानी होती है। लेकिन इन सबके बीच दु:खद बात यह है कि कॉरपोरेट गवर्नेंस की चर्चा तभी होती है, जब बड़े पैमाने पर कोई घपलेबाजी होती है।

कॉरपोरेट गवर्नेंस का मसला इन दिनों क्यों चर्चा में है?

आईटी कंपनी सत्यम के संस्थापक रामलिंगा राजू की करोड़ों की घपलेबाजी से कॉरपोरेट गवर्नेंस का मसला सतह पर आ गया है। असल में बीते साल के 16 दिसंबर से ही सत्यम में गड़बड़ी की आहट आने लगी थी। उस वक्त कंपनी ने 1.3 अरब डॉलर खर्च कर मेटास प्रॉपर्टीज में हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की थी।

इस घोषणा के बाद कंपनी के शेयरधारकों में खलबली मच गई और इसके शेयर जमीन पर आ गए। परिणाम यह हुआ कि कंपनी को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। बाद में राजू ने स्वीकार किया कि कंपनी के मुनाफे को गलत तरीके से पेश किया गया और कंपनी के पास फंड बहुत ही कम है। सत्यम की इस गड़बड़ी को भारत का सबसे बड़ा कॉरपोरेट घोटाला कहा जा रहा है। विडंबना है कि सत्यम ने बेहतरीन कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिए सितंबर 2008 में गोल्डन पीकॉक ग्लोबल अवॉर्ड जीता था।

No comments: