Thursday, October 2, 2008

निवेश से दीजिए महंगाई दर को मात

मुंबई : रिटायरमेंट की योजना बनाते वक्त बचत को संरक्षित रखने के बारे भी सोचना चाहिए। यही नहीं, आपको यह भी ख्याल रखना होगा कि आप इस पैसे को उन चीजों में लगाएं, जिससे वह मुद्रास्फीति से ज्यादा रफ्तार से बढ़े। इससे रिटायरमेंट के बाद भी मौजूदा लाइफस्टाइल को बनाए रखने की चिंता दूर हो जाएगी। निवेश का मिश्रण : महंगाई दर की तेज रफ्तार की वजह से नकदी तेजी से अपनी वैल्यू खो रही है, इसलिए पैसे का मौजूदा मूल्य बरकरार रखने के लिए भी निवेश करने की जरूरत होती है। रिटायरमेंट के लिए इक्विटी की तुलना में डेट को ज्यादा तरजीह दी जाती है। यहां रिटर्न के साथ पैसे की सुरक्षा भी मकसद होता है। रिटायरमेंट निवेश के लिहाज से आरबीआई बॉन्ड और डाक घर बचत योजनाएं काफी पॉपुलर हैं। अगर आपने पोस्टल मासिक इनकम स्कीम की अधिकतम सीमा तक निवेश कर दिया है तो आप फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान और म्युचूअल फंड के शॉर्ट टर्म बॉन्ड फंड पर गौर कर सकते हैं। इसके अलावा बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट भी आकर्षक हो सकते हैं क्योंकि उनमें से ज्यादातर 1 साल की अवधि के लिए दोहरे अंकों में ब्याज दे रहे हैं। अगर आप इनकम टैक्स के सबसे ऊपरी स्लैब में आते हैं तो रिटर्न के हिसाब से डेट म्युचूअल फंड, बैंक सावधि जमा पर भारी पड़ते हैं। हालांकि दोनों में क्रेडिट जोखिम अलग-अलग हैं। आपके पैसे का एक छोटा हिस्सा (5-7 फीसदी) इक्विटी इंडेक्स फंड या लार्ज कैप/ब्लूचिप इक्विटी स्कीम में जा सकता है। उन सेक्टरों को नजरअंदाज करने में समझदारी है। आपको आकस्मिक फंड तैयार करने की जरूरत होती है और इसके लिए सर्वश्रेष्ठ रास्ता लिक्विड फंड मुहैया कराते हैं। गोल्ड ईटीएफ का दामन भी थामा जा सकता है। इक्विटी बाजारों में उथल-पुथल के दौर में अगर सोना मुनाफा न दे तो कम से कम पोर्टफोलियो को स्थिरता तो देता ही है। सुरक्षाफंड को सही जगह लाने के साथ ही वित्तीय नुकसान से बचने के लिए बीमा तंत्र पर भी विचार करना होता है। रिटायरमेंट के बाद ऐसे कम ही लोग होते हैं जिन्हें जीवन बीमा की जरूरत पड़ती है लेकिन स्वास्थ्य बीमा की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता। कई बढ़िया कंपनियां अपने कर्मचारियों का बीमा कराती हैं। सेवानिवृत्ति होने पर ये बीमा कवर खत्म हो जाते हैं। कामकाजी जिंदगी के बाद के दौर के लिए मेडिकल इंश्योरेंस जरूरी होता है। इसलिए अगर आपने अपने और जीवनसाथी के लिए मेडिक्लेम नहीं खरीदा तो अब देर मत कीजिए। प्रक्रियागत मुद्दे : उम्र बढ़ने के साथ आपका भागना-दौड़ना कम हो जाता है इसलिए भुगतान और रसीद का कामकाज संभालना मुश्किल हो जाता है। ज्यादातर बैंक अपने खाताधारकों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के यह सेवा मुहैया कराते हैं। वक्त पर भुगतान करने से सेवाएं और सप्लाई जारी रहती हैं। मासिक पोस्टल स्कीम पर मिलने वाला ब्याज आपके बैंक खाते में क्रेडिट कर दिया जाता है, जिससे आपको हर महीने डाकघर के बाहर लाइन लगने की जरूरत नहीं होती।

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