Wednesday, April 1, 2009

New Star Package Policy is One of The Best Health Insurance plan

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निवेश के लिए किन-किन घटनाक्रमों का रखें ख्याल

बीती कुछ तिमाहियों के दौरान बाजार पर मंदी की छाया पड़ने के बाद पिछले सप्ताह वैश्विक बाजारों में ठीक - ठाक रैली देखी गई। बीते 10 कारोबारी सत्रों में महत्वपूर्ण बाजार इंडेक्स करीब 15 फीसदी चढ़े। बाजार में लौटी यह तेजी व्यापक थी और मंदी में पिटने वाले बैंकिंग तथा रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों के शेयरों को वापसी करने का मौका मिला। लेकिन यह रैली इस सप्ताह बरकरार नहीं रही। सप्ताह के पहले दिन बाजार की गिरावट ने यह साबित कर दिया कि निवेशकों में उत्साह लौटने की जो बात कही जा रही है , उसमें कितना दम है और भविष्य अब भी कितना अनिश्चित बना हुआ है। हाल में देखी गई तेजी वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटने और वापसी के शुरुआती संकेतों पर आधारित थी। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक बाजारों या अर्थव्यवस्थाओं में संभावित निर्णायक वापसी पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने इस तेजी को मंदी के असर वाले बाजार की एक और रैली करार देना मुनासिब समझा। इसे राहत की रैली भी कहा जा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार आने पर भारत जैसे उभरते हुए बाजारों में ज्यादा तेज और बड़ी रैली देखने को मिलेगी। ऐसा मुख्य रूप से विकसित बाजारों की तुलना में उभरते हुए बाजारों में अधिक बीटा फैक्टर की वजह से है।
कुछ ऐसी चीजें जिन्हें निवेश करते वक्त दिमाग में रखना चाहिए :
संभावित मजबूती
बीते कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान एकाध गिरावट के बावजूद बाजारों में तेज रैली दर्ज की गई और बाजार से जुड़े आम चलन पर नजर डाली जाए तो आने वाले दिनों में कुछ और मजबूती आ सकती है। बाजारों में हाल में जो तेजी आई है , वह काफी तेज और अनुमान से अलग थी , इसलिए ज्यादा निवेशक इसका फायदा नहीं उठा सके। ऐसे निवेशक अब बाजार की मौजूदा तेजी से जुड़ा मौका खोने का दु : ख मना रहे होंगे। लेकिन शेयर की कीमतों का पीछा करने और जल्दबाजी में ऊंचे स्तरों पर निवेश करने के बजाय बाजार में मजबूती लौटने तक इंतजार करने की सलाह दी जाती है। लेकिन वैश्विक और घरेलू , दोनों शेयर बाजार आने वाले दिनों में कौन सी राह पकड़ेंगे , इसे लेकर बिल्कुल सटीक ढंग से कुछ नहीं कहा जा सकता। हालांकि बुरी खबरों की गैर - मौजूदगी और अमेरिकी सरकार की ओर से पेश राहत पैकेज वैश्विक बाजारों में कुछ जान फूंकने का वादा जरूर कर रहा है।
वैश्विक बाजार
वैश्विक बाजारों में हालात अभी निर्णायक रूप से नहीं सुधरे हैं। बाजार की वर्तमान तेजी मुख्य रूप से शुरुआती संकेतों और कुछ विश्लेषकों एवं कंपनियों की ओर से सकारात्मक टिप्पणी की वजह से आई है। निवेशकों को सतर्क रवैया दिखाना चाहिए और जोखिम के दायरे में आने वाली पूंजी का एक अंश ही इक्विटी में निवेश किया जाना चाहिए। जो लोग बाजार में पैसा लगाते हैं , उन्हें वैश्विक खबरों और घटनाक्रमों पर निगाह रखनी चाहिए। वैश्विक बाजारों के घटनाक्रम मध्यम से लंबी अवधि में घरेलू बाजारों की चाल तय करने वाले अहम आधार होते हैं। अमेरिका और यूरोपीय बाजारों के अलावा एशिया की दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के घटनाक्रम भी घरेलू बाजारों की चाल पर असर डालते हैं।
सालाना रिटर्न
इस महीने सालाना नतीजों का मौसम शुरू होने वाला है। बाजारों के विशेषज्ञ सालाना नतीजों पर करीबी निगाह रखेंगे क्योंकि बीता कारोबारी साल काफी अलग और कंपनियों के लिए मुसीबतों से भरा था। विश्लेषक नए कारोबारी साल के लिए प्रबंधन के अनुमानों पर भी नजर रखेंगे। सालाना नतीजों का सीजन शुरू होने तक लंबी अवधि के लिए पैसा लगाने वाले निवेशकों को बाजार में नए निवेश को बरकरार रखना चाहिए। कंपनियों के सालाना नतीजे जल्द हमारे सामने होंगे। इनके आधार पर आप निवेश को लेकर आगे की राह तैयार कर सकते हैं। वित्तीय नतीजे आपको कंपनियों के बीच तुलना करने और भविष्य में उनकी संभावित स्थिति का अंदाजा लगाने का मौका देंगे।
राजनीतिक घटनाक्रम
आम चुनाव कुछ ही दिन दूर रह गए हैं। केंद्र में स्थिर सरकार होने पर बाजार सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के दौरान बाजारों में कुछ उठापटक हो सकती है और निर्णायक कदम केंद्र में नई सरकार उभरने के बाद उठ सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों को इन घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखनी चाहिए। जानकारों का कहना है कि केंद्र में अगर कांग्रेस या भाजपा की सरकार आती है तो बाजारों को इससे ज्यादा तकलीफ नहीं होगी लेकिन केंद्र में वामपंथी दलों और मायावती का प्रभुत्व बढ़ता है तो बाजार में उठापटक आने की आशंका कहीं ज्यादा है।
शोध जरूरी
निवेशकों के लिए बाजारों और शेयरों पर अलग - अलग स्त्रोतों से मत और निवेश के टिप्स पर कदम बढ़ाने के अलावा अपने स्तर पर किया जाने वाला विश्लेषण भी काफी अहमियत रखता है। निवेशकों को टिप्स जरूर लेनी चाहिए लेकिन फैसला अपना होना चाहिए। आम तौर पर बाजार में उपलब्ध विभिन्न आंकड़ों और जानकारी को समझना तथा उसका विश्लेषण करना आसान नहीं होता। इसके बावजूद निवेशकों को उन्हें समझने की कोशिश करनी चाहिए ताकि मेहनत की कमाई का निवेश करते वक्त उनका फैसला तार्किक और संतुलित हो। बाजार से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए आपके पास कई स्त्रोत उपलब्ध हैं लेकिन आपको किस स्त्रोत पर विश्वास करना है , इसका फैसला सबसे पहले कीजिए। गैर - विश्वसनीय स्त्रोतों से छनकर आने वाली खबरों पर भरोसा कर निवेश से जुड़े निर्णय जल्दबाजी में लेना , बेवकूफी के सिवा कुछ और नहीं।
निकलने का सही वक्त
बीते कुछ सप्ताह के दौरान बाजारों में कुछ बढ़ोतरी हुई है , ऐसे में यह उन निवेशकों के लिए माकूल वक्त है जो शेयर बेचकर निवेश से बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं। छोटी मियाद के लिए पैसा लगाने वाले लोगों को मौजूदा स्तरों पर मुनाफा वसूली करने के मौके तलाशने चाहिए और पहला मौका मिलते ही फायदा बटोरना चाहिए। जो निवेशक बाजार पर निगाह रखते हैं , उन्हें निवेश बरकरार रखना चाहिए लेकिन निवेश पर स्टॉप लॉस के साथ। आम तौर पर निवेशक मुनाफा वसूली न कर नुकसान के जाल में फंस जाते हैं।
-विकास अग्रवाल

Monday, March 30, 2009

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव पता करने का फॉर्मूला

बैंकों और वित्तीय संस्थानों के दिवालिया होने और उन्हें राहत पैकेज मुहैया कराने के इन दिनों में जिस अर्थशास्त्री कींस की सबसे ज्यादा बात हो रही है उन्होंने एक बार कहा था, 'आपके वित्तीय रूप से सक्षम रहने के मुकाबले कहीं ज्यादा दिन तक बाजार असंतुलित रह सकते हैं।' यह सिद्धांत यूं तो मंदडि़यों और तेजडि़यों, दोनों पर लागू होता है, लेकिन इसके तहत जो संदेशा छिपा है, वह स्पष्ट है जिसके बारे में किसी को कोई संदेह नहीं हो सकता। इसके मुताबिक बुद्धिमान निवेशक अगर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहने में सफल होता है तो उसका कामयाब होना तय है। क्या एसेट श्रेणी के तौर पर इक्विटी में निवेश करना चाहिए, इस बात का फैसला शेयर बाजार में उस वक्त जारी गतिविधियों पर निर्भर करना चाहिए। छोटे निवेशक को किसी शेयर विशेष में निवेश करने या उससे बाहर निकलने के लिए सही वक्त का अंदाजा लगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, लेकिन यह भी कहा जा सकता है कि हर निवेशक इक्विटी बाजारों में दाखिल होने या फिर बाहर निकलने का अंदाजा लगा सकता है। ऐतिहासिक रूप से शेयर बाजार उस वक्त चरम पर पहुंचते हैं जब ब्याज दरें काफी ऊंचाई पर हों या फिर जरूरत से ज्यादा विश्वास के बूते बाजार संबंधी क्रेडिट के लिए ज्यादा मांग की वजह से उस स्तर पर पहुंचने की संभावनाएं रखती हो। इक्विटी बाजारों के बारे में ज्यादा जानकारी न रखने वाला मेरा एक मित्र है, जो ब्याज दरों के चढ़ने पर इक्विटी में अपना सारा निवेश बेचकर सावधि जमा और इनकम फंड जैसे पारंपरिक निवेश उत्पादों की राह पकड़ता है। इस निवेशक ने इस दशक की शुरुआत में फिक्स्ड इनकम निवेश से इक्विटी का रास्ता पकड़ना शुरू किया था, जब ब्याज दरें काफी निचले स्तरों पर थीं। इसी निवेशक ने 2008 मध्य में इक्विटी से एफडी की ओर मुड़ना शुरू किया हालांकि वह जनवरी 2008 के दौरान बाजार की ऊंचाइयों का फायदा उठाने में नाकाम रहा। आज फिर यह रक्षात्मक अनुशासित निवेशक मुस्करा रहा है और दलील दे रहा है कि उसे अर्थव्यवस्था की कोई खास जानकारी नहीं है। जिन चीजों ने उसे सही वक्त पर सही फैसले करने के लिए प्रोत्साहित किया है, वह है सामान्य ज्ञान और भावनाओं पर सख्त नियंत्रण। बाजार में गुजारे 25 साल में मैंने कई बार ब्याज दरों और बाजार के चढ़ने या उतरने के बीच इस रिश्ते पर गौर किया है। मुझे इस निवेशक के पक्ष में खड़ा होने में कोई हिचकिचाहट नहीं है जिसने मार्केट की चाल समझने के लिए बाजार से जुड़ी जानकारी कम और सामान्य ज्ञान का ज्यादा इस्तेमाल किया। और वह भी ऐसे वक्त जब हर निवेशक पर बाजार 'जानकारी' की अभूतपूर्व आपूर्ति की बमबारी हो रही थी। अगर ब्याज से होने वाली आमदनी उत्पाद के साथ जुड़े कम जोखिम से ज्यादा है तो निवेशक की जोखिम सहने की क्षमता के आधार इक्विटी से उसकी ओर जाने के अवसर होते हैं। इसके उलट, मेरा एक खूब पढ़ा-लिखा मित्र भी है जो 10 साल पहले 150 रुपए के स्तर पर होने के वक्त एक बेहतरीन शेयर को पहचानने में कामयाब रहा। 2007 में जब वह 1,500 रुपए तक चढ़ा तो उसने बिकवाली कर मुनाफा वसूली करने की सलाह मिलने के बावजूद भी इंतजार करने का फैसला किया। 2008 में मंदी ने बाजार को घेरा तो यह शेयर नीचे आने लगा और मंदी के बाजार में एक साल से ज्यादा वक्त तक इंतजार करने के बाद इस दोस्त ने थक-हारकर यह शेयर 200 रुपए में बेचा और दावा किया कि वह कम से कम अपनी पूंजी बचाने में कामयाब रहा। यह गलती कई लोग करते हैं। ऐसे निवेशक ज्यादातर बार बढि़या मुनाफे पर बाहर निकलने में नाकाम रहते हैं और शेयर विशेष से भावनात्मक रूप से बंध जाते हैं। अनुशासित रवैया अपनाकर बाजार चक्र की जानकारी बटोरना काफी आसान है लेकिन अविश्वसनीय जानकारी की जरूरत से ज्यादा सप्लाई की वजह से एक शेयर विशेष चुनना निवेशक के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। कई शातिर सट्टेबाज बाजार में गैरकानूनी रूप से फायदा उठाने के लिए जानकारी का गलत फायदा उठाते हैं जिनके जाल में निवेशक आसानी से फंस जाते हैं। छोटी या मझोली कंपनियों में निवेश को लेकर काफी सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसी कंपनियों की बाजार में उपलब्ध जानकारी आमतौर पर गलत या भ्रामक होती हैं। छोटे निवेशकों को इस ग्रुप की केवल उन्हीं कंपनियों में निवेश करना चाहिए जिनके बारे में उन्हें पुख्ता जानकारी है। बहुत से निवेशक लक्ष्यों और अनुशासन के साथ इक्विटी बाजार में प्रवेश तो करते हैं लेकिन बाद में अक्सर वे सट्टेबाजों की तरह ट्रेडिंग करने लगते हैं। एक बात याद रखें कि इक्विटी बाजार में तभी सफलता मिलती है जब आप लालच को छोड़कर सही जानकारी और समय पर निवेश करते हैं।
-सी. जे. जॉर्ज, मैनेजिंग डायेरक्टर, जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज

Monday, March 23, 2009

डेट में निवेश बढ़ाने का यही है समय

मुद्रास्फीति की दर उम्मीद के अनुसार नीचे की ओर जा रही है। पिछले सप्ताह ही इसने कई सालों की न्यूनतम दर का नया आंकड़ा छुआ है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में हम नकारात्मक मुद्रास्फीति या अपस्फीति का दौर देख सकते हैं। ऐसे में दरों में कटौती की अटकलें और मजबूत हुई हैं। उम्मीद है कि भारत में ब्याज दर 150 बेसिस अंकों तक घट सकती है। इसका मतलब है कि बेंचमार्क उधारी दर एकल अंक में और होम लोन पर ब्याज दरें 7-8 फीसदी के स्तरों पर पहुंच सकती हैं। बैंकों ने भी भविष्य के अनुमानों को देखते हुए कर्ज की दरों में बदलाव करने शुरू कर दिए हैं। कुछ सरकारी बैंकों ने वेरिएबल आधार पर कार लोन दरें तय करने की शुरुआत की है। कुछ मामलों में एक साल के लोन पर कम ब्याज दरों की पेशकश की जा रही है। उदाहरण के तौर पर एक सरकारी बैंक एक वर्ष के लिए आठ फीसदी की ब्याज दर की पेशकश कर रहा है। यह रणनीति इस बात का भी संकेत है कि अगले 12 महीनों में दरें तेजी से गिर सकती हैं। निवेशक यह जानते हैं कि ब्याज दर गिरने से गिल्ट फंडों और इनकम फंडों की यील्ड में सुधार होता है क्योंकि इनकी यील्ड का ब्याज दरों के मौजूदा चलन से उलटा रिश्ता होता है। इसी वजह से जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो इन प्रोडक्ट्स की यील्ड बढ़ती है और जब दरों में गिरावट का दौर आता है तो यील्ड ऊपर जाती है। निवेशकों की दृष्टि से अगले 12 महीनों के लिए डेट में आवंटन पर फिर से विचार करने की जरूरत है और लघु अवधि में डेट में निवेश बढ़ाया जा सकता है। पिछले कुछ दिनों में शॉट कवरिंग से शेयर बाजार में कुछ उछाल देखा गया है लेकिन मध्यम अवधि के निवेशकों को इससे राहत मिलने की संभावना नहीं है। मध्यम अवधि 12-18 महीने की हो सकती है। बाजार की मौजूदा चाल लघु और लंबी अवधि के निवेशकों को अच्छे मौकों की पेशकश कर रही है। इक्विटी निवेशक भी अगले 6-12 महीनों में गिल्ट फंडों में निवेश पर विचार कर सकते हैं। नियमित नकद प्रवाह पर निर्भर लंबी अवधि के निवेशक 3-5 वर्ष के डिपॉजिट या फिक्स्ड मंथली प्रोडक्ट्स में धन लगा सकते हैं क्योंकि 9-9.5 फीसदी की ब्याज दरें ज्यादा समय तक बरकरार रहने की उम्मीद नहीं है। कुछ महीने पहले तक फिक्स्ड मंथली प्रोडक्ट्स को लेकर निवेशक ज्यादा रुचि नहीं ले रहे थे लेकिन अब तस्वीर बदल गई है और कुछ फंडों ने ऐसे प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं। लेकिन यील्ड एकल अंक में पहुंच गई है और फंड हाउस भी तीन वर्ष की बजाए एक वर्ष की अवधि की पेशकश कर रहे हैं। डबल इंडेक्सेशन का फायदा मिलने से फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में इनमें निवेश बेहतर हो सकता है। मुद्रास्फीति के निचले स्तर पर पहुंचने की वजह से भी इस तरह का निवेश फायदेमंद नजर आ रहा है। लघु अवधि (कम से कम छह महीने) में टेजरी प्लान और गिल्ट फंड डेट में अच्छे विकल्प हैं। ये उन निवेशकों के लिए मुफीद हैं जो 3-6 महीनों के लिए निवेश की योजना बना रहे हैं।
-श्रीकला भाष्यम

Saturday, March 21, 2009

मंदी में कैसे तैयार करें बेहतर पोर्टफोलियो

ज्यादातर निवेश उत्पाद अनुमानित रिटर्न देने के मामले में नाकाम साबित हो रहे हैं। ऐसे में निवेशक पोर्टफोलियो तैयार करने के लिए निवेश की सही रणनीति को लेकर उलझन में हैं। उत्पादों का चुनाव निवेशक की जोखिम सहने की क्षमता और निवेश की अवधि पर निर्भर करता है। मौजूदा हालात में एक बढ़िया पोर्टफोलियो तैयार करने के लिए अलग-अलग तरह के कई फाइनेंशियल प्रोडक्ट की जरूरत होगी। नई शुरुआत करने वाले शख्स के लिए यह काम ज्यादा आसान है। छोटी अवधि के लिए रणनीति लेकर चलने वाले निवेशक के लिए यह काफी बड़ी चुनौती है। मसलन, अगर कोई निवेशक अपने आप को 2010 तक रकम जोड़ने के लिए तैयार कर रहा है तो उसके पास काफी कम मौके बचते हैं क्योंकि मुनाफा बटोरने के लिए उसके पास आगे अनिश्चितता से भरा एक साल खड़ा है और उसकी संपत्ति 25-30 फीसदी का झटका सहने की जद में खड़ी है। बॉटम आउट होने से पहले साल 2009 निवेशकों को कुछ और दर्द दे सकता है, ऐसे में मौजूदा स्थिति आने वाले वर्षों में रकम जोड़ने के लिए कुछ सबक सिखाती है। अतीत में बाजार की तेजी में हिस्सा न लेने की वजह से अपनी किस्मत को कोसने वाले निवेशक भविष्य के लिए बेहतर रणनीति तैयार कर सकते हैं।
गिरावट में खरीदें, तेजी पर बेचें
बीते पांच साल की अवधि में निवेश का बुनियादी सिद्धांत लगभग पूरी तरह भुला दिया गया है। इसकी मुख्य वजह यह है कि ज्यादातर निवेश उत्पादों में बढ़िया तेजी देखी गई है। दूसरा अहम कारण घरेलू और विदेशी निवेशकों की ओर से बढ़िया नकद प्रवाह रहा है। लेकिन अब तरलता का तालाब सूख रहा है और आर्थिक वृद्धि के आंकड़े भी चुनौती भरे भविष्य की ओर से इशारा कर रहे हैं, ऐसे में ज्यादातर निवेश उत्पादों के दाम अब निरंतर रूप से घट रहे हैं। हालात भले निराशाजनक स्थिति की ओर इशारा करें या फिर निवेश को लेकर कम उत्साह दिखाने की सलाह दें लेकिन लंबी अवधि के लिए पैसा लगाने वाले निवेशकों को मौजूदा हालात को खरीदारी के अवसर के तौर पर देखना चाहिए। आखिरकार, जो लोग निम्न स्तरों पर खरीदारी कर ऊंचे स्तर पर बिकवाली करने का काम करते हैं, लंबी मियाद में उन्हें ही चतुर निवेशकों के रूप में जाना जाता है। निचले स्तरों पर शेयर खरीदना जितना आवश्यक है, पैसा बनाने के लिए उन्हें बढ़िया स्तरों पर बेचना भी उतना ही जरूरी है। निवेश से बाहर निकलने की रणनीति आपके उत्पादों के बाजार भाव, हाथ में नकदी की जरूरत या किसी उत्पाद विशेष के लिए आपके आवंटन पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए अगर पोर्टफोलियो का 20 फीसदी अंश इक्विटी से ताल्लुक रखता है तो बाजार में तेजी के वक्त आपकी चांदी हो सकती है जो इसे कुल संपत्ति की 40 फीसदी हिस्सेदारी तक ले जा सकती है। मौजूदा हालात में एक विकल्प पोर्टफोलियो में दोबारा संतुलन कायम करने से जुड़ा है जिसमें आप इक्विटी से मुनाफा वसूली कर उससे मिलने वाला पैसा डेट में डाल सकते हैं या अतिरिक्त फंड के साथ डेट आवंटन का स्तर बढ़ा सकते हैं। ऐसी रणनीति ने आपको वित्तीय लक्ष्यों तक पहुंचने में मदद देगी बल्कि मुनाफा वसूली भी सुनिश्चित करेगी जो निवेश की योजना से जुड़ा अहम अंश है। दूसरी ओर अगर आपके पास निवेश के लिए लंबी अवधि है तो भी आप संपत्ति बना सकते हैं। ऐसे हालात में निवेश की प्रक्रिया में जोखिम प्रबंधन को शामिल किया जा सकता है, क्योंकि आपका निवेश नियमित रूप से होगा और एकमुश्त रकम नहीं लगाई जाएगी। इस तरह आप अपने निवेश खर्च को एवरेज आउट कर सकते हैं।
निवेश अनुशासन
शेयर खरीदकर एकत्र करने की रणनीति का एक और अहम अंश है नियमित फोकस और अनुशासन का पालन। यह अनिवार्य पक्ष है हालांकि आपको हर वक्त एक ही तरह के उत्पादों से चिपके रहने की जरूरत नहीं है। मसलन, अगर आपने पांच साल की अवधि के लिए स्मॉल कैप फंड का सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान लिया है तो मौजूदा स्थिति में आप उस फंड में आवंटन कम कर सकते हैं और लार्ज कैप फंड का दामन थाम सकते हैं। वास्तव में, लार्ज कैप शेयर या फंड लंबी अवधि के पोर्टफोलियो के लिए सुरक्षित दांव हैं, क्योंकि उनमें बेहतर तरीके से बाजार की उथल-पुथल में बने रहने की क्षमता होती है। दूसरी ओर, मध्यम और छोटी कंपनियां कुछ जोखिम रखने के बावजूद बेंचमार्क इंडेक्स को पीछे छोड़ने का माद्दा रखती हैं। शेयर या म्यूचुअल फंड की पसंद के बावजूद पैसे जोड़ने की कोई भी रणनीति तब तक अधूरी है जब तक कि आप नियमित अंतराल पर निवेश की निगरानी रखने की आदत नहीं रखते। इन दिनों प्रोफेशनल से मदद मिल सकती है, जिससे यह काम काफी हद तक आसान हो जाता है।
-श्रीकला भाष्यम

Wednesday, March 18, 2009

Mukesh Ambani


Mukesh Ambani is the Chairman, Managing Director and the largest shareholder of Reliance Industries, India`s largest private sector enterprise and a Fortune 500 company. His personal stake in Reliance Industries is 48%. His wealth is valued at US$20.8 billion (according to Forbes), making him the richest man in Asia.Mukesh and younger brother Anil are sons of the late founder of Reliance Industries, Dhirubhai Ambani. Mukesh also owns the Indian Premier League team Mumbai Indians.Mukesh Ambani was educated at Abaay Morischa School in Mumbai and completed his graduation with a bachelor`s degree in chemical engineering from the UDCT. Mukesh later enrolled for an MBA from Stanford University but completed only one year of the two year program. Mukesh Ambani joined Reliance in 1981 and initiated Reliance`s backward integration from textiles into polyester fibres and further into petrochemicals. In this process, he directed the creation of 60 new, world-class manufacturing facilities involving diverse technologies that have raised Reliance`s manufacturing capacities from less than a million tonnes to twelve million tonnes per year.He directed and led the creation of the world`s largest grassroots petroleum refinery at Jamnagar, Gujarat, India, with a present capacity of 660,000 barrels per day (105,000 m?/d) (33 million tonnes per year) integrated with petrochemicals, power generation, port and related infrastructure, at an investment of Rs 100000 crore (nearly $26 billion USD).Mukesh Ambani set up one of the largest telecommunications companies in India in the form of Reliance Communications (formerly Reliance Infocom) Limited. However, Reliance Infocom now is under Anil Dhirubhai Ambani Group post the brothers` split. Under him Reliance Retail has also launched a new chain called Delight stores and also signed a letter of intent with NOVA Chemicals to make energy-efficient structures for Reliance Retail. Ambani owns the Indian Premier League team Mumbai Indians.AchievementsChosen the businessman of the year 2007 by a public poll in India conducted by NDTV Conferred the United States-India Business Council (USIBC) leadership award for Global Vision 2007 in Washington.Ranked 42nd among the World`s Most Respected Business Leaders and second among the four Indian CEOs featured in a survey conducted by Pricewaterhouse Coopers and published in Financial Times, London, November 2004.Conferred the World Communication Award for the Most Influential Person in Telecommunications in 2004 by Total Telecom, October, 2004.Chosen Telecom Man of the Year 2004 by Voice and Data magazine, September 2004.Ranked 13th in Asia`s Power 25 list of The Most Powerful People in Business published by Fortune magazine, August 2004.Conferred the Asia Society Leadership Award by the Asia Society, Washington D.C., USA, May 2004.Ranked No.1 for the second consecutive year, in The Power List 2004 published by India Today, March 2004.Recorded as the first Trillionaire in India, June 2007.Awarded the Chitralekha Person of the Year Award -- 2007 by Gujarat Chief Minister Narendra Modi

Lakshmi Mittal


Lakshmi Mittal is an Indian industrialist based in the United Kingdom. He was born in Sadulpur village, in the Churu district of Rajasthan, India, and he resides in Kensington, London. He is the Chairman and CEO of ArcelorMittal (founder of Mittal before merger with Arcelor) and also serves as a non-executive director of Goldman Sachs, EADS and ICICI Bank.Mittal was born in a Rajasthan Agrawal family and spent his initial years in India, living with his extended family on bare floors and rope beds in a house built by his grandfather. The family eventually moved to Calcutta where his father, Mohan, became a partner in a steel company and made a fortune. Mittal graduated from St. Xavier\'s College in Calcutta with a Bachelor of Commerce degree in Business and Accounting in 1969.Mr. Mittal began his career working in the family\'s steelmaking business in India, and in 1976, when the family founded its own steel business, he set out to establish its international division, beginning with the buying of a run-down plant in Indonesia. Shortly afterwards he married Usha, the daughter of a well-to-do moneylender. In 1994, due to differences with his father, mother and brothers, he branched out on his own, taking over the international operations of the Mittal steel business, which was already owned by the family. Mittal\'s family never spoke publicly about the reasons for the split.In March 2008, Mittal was reported to be the 4th wealthiest person in the world, and the wealthiest in Asia, by Forbes Magazine (up from 61st. richest in 2004) up one place since a year ago. The Mittal family owns a controlling majority stake in ArcelorMittal, the world\'s largest steel company. His residence at Kensington Palace Gardens was purchased from Formula One boss Bernie Ecclestone in 2004 for ?57 million (US$128 million), making it the world\'s most expensive house, at that date.In 2008 Mittal awarded Abhinav Bindra with Rs. 1.5 Crore, for getting India its first individual Olympic gold medal in shooting.Awards2008: Padma Vibhushan 2007: Bessemer Gold Medal 2006: Person of the Year - Financial Times 2004: European Businessman of the Year - Fortune magazine1998: Willy Korf Steel Vision Award - American Metal Market and PaineWeber?s World Steel Dynamics 1996: Steelmaker of the Year - New Steel